मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों हेतु संस्थागत विकास योजना पर विस्तृत राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित
हरियाणा उच्चतर शिक्षा परिषद के तत्वावधान में तथा उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा के सहयोग से राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-1, पंचकूला में संस्थागत विकास योजना विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य के प्रस्तावित 22 मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों के लिए दीर्घकालिक, परिणामोन्मुख एवं गुणवत्तापूर्ण विकास योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत से हुई।इस अवसर पर उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा के निदेशक एस. नारायणन ने अपने संबोधन में कहा कि संस्थागत विकास योजना तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं, संसाधनों की उपलब्धता तथा विद्यार्थियों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राचार्यों एवं नोडल अधिकारियों को एक स्पष्ट कार्य-दिशा प्रदान करेगा, जिससे वे अपने संस्थानों को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित कर सकें।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में हरियाणा उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के. सी. शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे समग्र व्यक्तित्व विकास, कौशल संवर्धन एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों की स्थापना इसी दृष्टिकोण का परिणाम है, जिनमें उत्कृष्ट अधोसंरचना, नवीन शिक्षण पद्धतियाँ तथा अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यक्रम के आयोजन में नीरज शर्मा, एचसीएस, संयुक्त निदेशक (प्रशासन), निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग का विशेष योगदान रहा। कार्यशाला में राज्य के 22 प्रस्तावित मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं नोडल अधिकारी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विशेषज्ञ मार्गदर्शकों ने सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को संस्थागत विकास योजना के विभिन्न आयामों जैसे—दृष्टि एवं मिशन निर्धारण, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अधोसंरचना विकास, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, छात्र सहायता सेवाएँ, अनुसंधान एवं नवाचार, उद्योग-संस्थान सहयोग तथा गुणवत्ता आश्वासन तंत्र—के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान समूह चर्चा, अध्ययन-प्रकरण विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण तथा सहभागितापूर्ण सत्रों का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करते हुए सुधारात्मक एवं नवाचारी उपायों पर विचार-विमर्श किया।
इस दौरान डॉ. मंजुला चौधरी, डॉ. अलका शर्मा, संयुक्त निदेशक, उच्चतर शिक्षा निदेशालय, डॉ. शैलजा, प्राचार्या, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-1, पंचकूला, मीनाक्षी शर्मा, सहायक निदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग तथा श्री साहू, श्री राठौर और दीप्ति सक्रिय रूप से संलग्न रहे कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।


