विदुरानी और श्री कृष्ण की प्रेम गाथा निश्छल भक्ति का प्रतीक-- स्वामी राम जी दास वशिष्ठ
पंचकूला 11 फरवरी,
"विदुर की पत्नी विदुरानी की प्रेम गाथा निश्छल भक्ति का प्रतीक है। जब कृष्ण हस्तिनापुर में दुर्योधन का शाही भोजन त्याग कर विदुर की कुटिया में गए तो प्रेम में अंधी विदुरानी ने उन्हें केले के गुदे की बजाय छिलके खिला दिए थे। भगवान ने उस सच्चे प्रेम को स्वीकार किया और केले के छिलके स्वाद ले कर खाए जो यह सिद्ध करता है कि कृष्ण केवल भाव और भक्ति के भूखे हैं।"
यह प्रवचन सेक्टर 10 के सनातन धर्म मंदिर के प्रांगण में वार्षिक मूर्ति स्थापना उत्सव के दूसरे दिन स्वामी राम जी दास वशिष्ठ जी ने अपने मुखारविंद से व्यक्त किए।
आज बुधवार को भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ को अपने उद्बोधन में स्वामी जी ने विदुर जी के हस्तिनापुर त्याग की जानकारी देते हुए बताया कि जब धृतराष्ट्र को अधर्म का साथ न देने की सलाह पर धृतराष्ट्र द्वारा विदुर जी का अपमान करने से दुखी विदुर जी वन चले गए और अंत में वे अपनी आत्मा का परमात्मा से मिलन करा कर देह त्याग कर दिया।
स्वामी राम जी दास वशिष्ठ ने बताया कि भक्त प्रहलाद की रक्षा और अत्याचारी हिरणाकश्यप का वध करने के लिए नरसिंह अवतार लिया। हिरणाकश्यप की तमाम हत्या की कोशिशों के बावजूद प्रहलाद विष्णु भक्ति में अटल रहा जिस के बाद भगवान ने 'नरसिंह अवतार' ले कर प्रहलाद की रक्षा की। उन्होंने गोधूली बेला में घर की चौखट पर अपनी जांघों पर लिटा कर नाखूनों से उस का सीना चीर कर उस का वध किया और अपनी पत्नी भूमि को वापिस स्थापित किया।
स्वामी राम जी दास वशिष्ठ ने श्रद्धालुओं को ध्रुव की भगवान विष्णु की अटूट भक्ति का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि किस प्रकार अपनी सौतेली मां द्वारा अपमानित किए जाने पर तपस्या कर के भगवान विष्णु को प्रसन्न कर ध्रुव तारे के रूप में अमर हो जाते हैं जो ईश्वर में अथाह आस्था और दृढ़ता का प्रतीक है।
कथा के दौरान स्वामी कमल राम जी दास के मधुर रसीले भजनों पर श्रद्धालु खूब नाचे झूमे और सारा मंदिर परिसर जय कृष्णा जय राधे के जयकारों से भक्तिमय हो गया।
कथा के समापन पर मंदिर सभा द्वारा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण और स्वादिष्ट भंडारा वितरण का आयोजन किया गया।


